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राजेन्द्र नगर सेक्टर-2 में आवासीय डुप्लेक्स तोड़कर अवैध निर्माण, ना एक्शन-ना रिएक्शन, जिम्मेदार मौन!

लेखक की तस्वीर: Jantantra Live
Jantantra Live
12 सित॰
3 मिनट पठन

गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश में नया बिल्डिंग बाइलॉज तो लागू हो गया मगर गाजियाबाद में नए बिल्डिंग बाइलॉज का पालन कराने में अधिकारी खासकर प्रवर्तन जोनों में तैनात अभियंता कोई दिलचस्पी नहीं ले रहे इसलिए जिले में ना तो अवैध निर्माण थम रहे हैं और ना ही आवासीय भूखंडों पर व्यवसायिक गतिविधियां। प्रवर्तन जोन 7 के अंतर्गत राजेन्द्र नगर सेक्टर 2 में बिल्डिंग बाइलॉज को ताक पर रखकर जिस तरह से बहुमंजिला अवैध निर्माण किए गए हैं उससे प्रवर्तन में तैनात अभियंताओं की सजगत और कार्यशैली पूरी तरह कटघरे में हैं।

दरअसल, यहां आरएन ब्लॉक आवासीय डुप्लेक्स संख्या 1 पर बने डुप्लेक्स को भूस्वामी द्वारा जीडीए की बिना अनुमति के तोड़कर मूल स्वरूप को बदलते हुए नए सिरे से बहुमंजिला निर्माण कर लिया गया जिसमें बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर को कॉमर्शियल इस्तेमाल के लिए शटर लगाकर दुकान बना दी गई है।

बिल्डिंग बाइलॉज को ताक पर रख कर किए गए उक्त अवैध निर्माण में यह भी जांच का विषय है कि इसे स्वीकृत मानचित्र के विपरीत बनाया गया है या फिर मानचित्र स्वीकृत कराए बिना ही अवैध निर्माण कर लिया गया है। काबिलेगौर है कि इस तरह का यह अकेला अवैध निर्माण नहीं है बल्कि यहां धीरे धीरे कई डुप्लेक्स को तोड़कर कर आवासीय भूखण्ड पर मकान के साथ ही दुकान भी निर्मित किए जा चुके हैं।

अवैध निर्माणकर्ताओं की प्रवर्तन में तैनात अभियंताओं से सांठगांठ का नतीजा मकान में दुकानःप्रवर्तन में तैनात अभियंता ऊपरी कमाई का मोह नहीं छोड़ पा रहे हैं। नियमानुसार निर्माण की पेचीदगियों से बचने के लिए लोग प्रवर्तन विभाग के सुपरवाइजर तक अपनी सेटिंग करके अवैध निर्माण करने में कामयाब हो रहे हैं और प्रवर्तन विभाग इनकी तरफ देखकर भी सबको नजरअंदाज कर रहा है। यही कारण है कि अवैध निर्माण पर किसी तरीके की कोई कार्रवाई नहीं की गई, ना सीलिंग और ना ही ध्वस्तीकरण। आवासीय भूखंड पर व्यावसायिक गतिविधि के लिए शटर लगा लिए गए और व्यावसायिक गतिविधियाँ चालू भी कर दी गई। इसी पैटर्न पर बड़े पैमाने पर रिहाइशी इलाकों में व्यवसायिक निर्माण हो चुके हैं। आवासीय भूखंड पर पहले निर्माण करना, फिर शटर लगाना और उसके बाद व्यावसायिक गतिविधियां शुरू कर देना यदि सामान्य प्रक्रिया बनती जा रही है तो यह शहर की नियोजित विकास व्यवस्था के लिए गंभीर खतरे की घंटी है।

अदालती आदेशों की अनदेखी लगातार जारी: याद दिला दें कि सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट के सख्त आदेश हैं कि आवासीय में व्यवसायिक गतिविधियां किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं होंगी। यदि संबंधित विकास प्राधिकरण के अभियंता सुपरवाइजर या अन्य अधिकारी की मौजूदगी और जानकारी में ऐसे निर्माण होते हैं या होते पाए जाते हैं तो उनकी जवाबदेही तय की जाएगी पर गाजियाबाद में अदालत की सख्त चेतावनी के बाद भी जीडीए के अधिकारियों का क्या रवैया है, इसे उपरोक्त अवैध निर्माण स्पष्ट करता है

कोढ़ में खाज बने अवैध निर्माण: यह पहलू भी गौर करने लायक है कि हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार ने विकास प्राधिकरणों में एक नया बिल्डिंग बायलॉज लागू किया है जिसमें यह प्रावधान है कि 24 मीटर चौड़े मार्ग पर आवासीय भूखण्ड पर पहले से निर्मित व्यावसायिक दुकान को नियमानुसार शमन के दायरे में लाया जा सकता है। इसके लिए गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने सर्वे कर 4 हजार से अधिक नोटिस जारी किए मगर भूस्वामियों ने प्राधिकरण की शमन नीति में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई और प्राधिकरण ने भी आवासीय भूखण्ड पर निर्मित व्यवसायिक निर्माण पर सख्ती नहीं बरती है। इस कारण से गाजियाबाद में प्राधिकरण की शमन नीति टांय टांय फुस्स हो गई। वीसी को बड़ी व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर सख्ती दिखानी पड़ी मगर छोटे स्तर पर आवासीय भूखण्ड पर निर्मित व्यावसायिक दुकानों का जीडीए शमन कर नहीं पा रहा वहीं मकान में नई दुकान बनती जा रही हैं, यह स्थिति कोढ़ में खाज जैसी है।

 
 
 

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