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यूपी विधानसभा में एसआईआर के मुद्दे पर जोरदार हंगामा

  • लेखक की तस्वीर: Jantantra Live
    Jantantra Live
  • 23 दिस॰ 2025
  • 2 मिनट पठन

कांग्रेस विधायक बोलीं-10 बीएलओ की हुई मौत, खन्ना बोले-नियमानुसार मिलेगा लाभ



लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र में मंगलवार को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया. विपक्ष ने एसआईआर के दौरान बूथ लेवल ऑफिसर्स (बीएलओ) पर अत्यधिक कार्यभार के कारण हुई मौतों और कथित गड़बड़ियों पर चर्चा की मांग की. लेकिन, सदन के अधिष्ठाता ने प्रस्ताव को खारिज कर दिया. सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने स्पष्ट किया कि यह पूरा मामला चुनाव आयोग का है, क्योंकि बीएलओ चुनाव ड्यूटी पर डेपुटेशन में कार्यरत हैं.

विपक्ष की ओर से चर्चा की शुरुआत कांग्रेस विधायक दल नेता आराधना मिश्रा 'मोना' ने की. उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर के दौरान बीएलओ पर अप्रत्याशित बोझ डाला गया है. शिक्षक और लेखपाल दिन भर अपना नियमित काम करने के बाद घर-घर सर्वे करते हैं. रात में डाटा अपलोड करने की चुनौतियों का सामना करते हैं. मोना ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान अब तक 10 बीएलओ की मौत हो चुकी है, लेकिन सरकार ने इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया. चुनाव आयोग भी इस मामले में मौन है. उन्होंने मांग की कि मृतक आश्रित परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा और समकक्ष सरकारी नौकरी दी जाए.

इसके बाद समाजवादी पार्टी के बिजनौर (नगीना) से विधायक मनोज कुमार पारस ने भी सरकार पर हमला बोला. पारस ने विवादास्पद बयान देते हुए कहा कि एसआईआर के जरिए मुसलमानों की एनआरसी कराई जा रही है. मुसलमान दिन में पांच बार इस देश की मिट्टी का सजदा करते हैं, कौन हिंदू ऐसा करता है? यह बताया जाए. साथ ही उन्होंने मोहम्मद अली जिन्ना को 'साहब' कहकर संबोधित किया, जिस पर सदन में हंगामा बढ़ गया. जवाब में संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने सरकार का पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि पीपल्स रिप्रेजेंटेटिव एक्ट के तहत सभी सरकारी कर्मचारी चुनाव आयोग के डेपुटेशन पर कार्य करते हैं. इसलिए यह विषय पूरी तरह चुनाव आयोग का है. खन्ना ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, दर्द घुटने का है और इलाज दांत का हो रहा है. उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि किसी सरकारी कर्मचारी की मृत्यु होती है तो नियमानुसार परिवार को लाभ जरूर दिया जाएगा. एसआईआर चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया है, जो उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में चल रही है. इस दौरान बीएलओ घर-घर जाकर मतदाता विवरण सत्यापित कर रहे हैं. विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया में अत्यधिक दबाव के कारण कई बीएलओ की मौत हुई है.


 
 
 

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