दिल्ली में इन्वेस्टमेंट फ्रॉड नेटवर्क का भंडाफोड़
- Jantantra Live

- 8 दिस॰ 2025
- 2 मिनट पठन
6.33 करोड़ की ठगी में शामिल 3 लोग गिरफ्तार

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पूरे देश में फैले एक खतरनाक साइबर-फाइनेंशियल फ्रॉड नेटवर्क का पदार्फाश किया है। यह गिरोह लोगों को रएइक-रजिस्टर्ड स्टॉक ब्रोकर बताकर प्री-कढड शेयरों, सेकेंडरी मार्केट और आॅफ-मार्केट ट्रेडिंग में तगड़ा मुनाफा दिलाने का लालच देकर करोड़ों रुपये ठग रहा था। अब तक देशभर से इस नेटवर्क से जुड़ी 165 साइबर शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं और पुलिस ने 6।33 करोड़ रुपये तक का फंड ट्रेल सफलतापूर्वक ट्रेस कर लिया है। क्राइम ब्रांच की इंटर-स्टेट सेल ने 50 लाख के ढअठ-कल्ल्िरं फ्रॉड का भंडाफोड़ करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। फ्रॉड का भंडाफोड़ करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जिन तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है उनमें प्रवास चंद्र पांडा, प्रीतम रोशन पांडा और सृतम रोशन पांडा, ओडिशा में चल रहे म्यूल अकाउंट नेटवर्क को आॅपरेट कर रहे थे। जांच में सामने आया कि ठग खुद को वैध ब्रोकर बताते थे और पीड़ितों को नकली रएइक सर्टिफिकेट, जाली ट्रेडिंग ऐप, रियल-टाइम जैसे दिखने वाले फर्जी ग्राफ और मनगढ़ंत प्रॉफिट स्क्रीनशॉट दिखाकर विश्वास जीतते थे। एक ही पीड़ित से आरोपियों ने अलग-अलग खातों में करीब 49।73 लाख रुपये जमा करवा लिए। यह पूरा नेटवर्क बेहद शातिर तरीके से चार परतों में काम करता था ताकि पुलिस की नजर से बचकर ठगी का पैसा आसानी से गायब किया जा सके। सबसे आगे फ्रंट-एंड आॅपरेटर्स होते थे, जो सोशल मीडिया पर खुद को 'निवेश गुरु' बताकर मुनाफे के लालच में लोगों को फंसाते थे। आरोपियों के जरिए ठगे गए पैसे सबसे पहले लेयर-1 अकाउंट्स में आते थे, जहां से तुरंत आगे रूट कर दिए जाते थे। इसके बाद लेयर-2 म्यूल अकाउंट्स की बारी आती थी, जो तेजी से लेयरिंग और डायवर्शन का काम करते थे।
अंतिम चरण में कैश कलेक्टर्स और रीजनल हैंडलर्स नकदी निकालकर उसे पूरी तरह गायब कर देते थे। इससे फंड ट्रेल को तोड़ना लगभग नामुमकिन हो जाता था। इनमें सबसे अहम खाता था श्रीजी अपैरल्स का, जिसे मुख्य आरोपी प्रवास चंद्र पांडा संचालित कर रहा था। ठगी की रकम को पांच अलग-अलग खातों में लेयरिंग, कैश विदड्रॉल और तेज ट्रांसफर के जरिए छुपाने की कोशिश की जा रही थी।



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