वाराणसी में तीन करोड़ का सोना चुराने वाले पांच गिरफ्तार
- Jantantra Live

- 9 जन॰
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केयरटेकर और उसके साथ मकान में रहने वाले दोस्तों ने की चोरी की प्लानिंग

वाराणसी : चौक थाना क्षेत्र के कर्णघंटा इलाके में 5 जनवरी को हुई करीब दो किलो से अधिक सोने की चोरी का खुलासा पुलिस ने किया है. मामले में पांच अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है. सोने की अनुमानित कीमत तीन करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है. पकड़े गए आरोपियों की पहचान दीपेश चौहान निवासी बारी गांव, थाना मडियाहू, जौनपुर, विकास बेनवंशी निवासी मौधा, थाना खानपुर, गाजीपुर, शुभम विश्वकर्मा निवासी मौधा, थाना खानपुर, गाजीपुर, सैनुद्दीन अंसारी निवासी मौधा, थाना खानपुर, गाजीपुर तथा तारक घोराई निवासी गोपालपुर, थाना दासपुर, पश्चिमी मेदिनीपुर (पश्चिम बंगाल) के रूप में हुई है.

एडीसीपी सरवन टी ने बताया, चौक थाने में दयाशंकर कटरे के ऊपरी तल पर मुंबई में रहने वाले दिवाकर राणा ने दो फ्लैट किराए पर ले रखा है. इनमें सोना गलाने का काम होता है. 5 जनवरी को कारखाने से दो किलो से ज्यादा सोना चोरी किया गया था. पीड़ित दिवाकर राणा ने चौक थाने में तहरीर दी थी. पीड़ित ने केयरटेकर तारक घोराई पर घटना में शामिल होने का शक जताया था. पुलिस ने केयरटेकर से पूछताछ की तो उसने पूरी सच्चाई उगल दी. तारक घोराई ने बताया कि उसके साथ मकान में रहने वाले दोस्त भी चोरी की घटना में शामिल थे. पुलिस ने चोरी हुए 2 किलो 122 ग्राम सोने को रिकवर किया है. जिसकी अनुमानित कीमत 3 करोड़ रुपए से ज्यादा है. बनारस पुलिस की अब तक की यह सबसे बड़ी रिकवरी है.

एडीसीपी सरवन टी ने बताया, चोरी की प्लानिंग तीन महीने पहले की तैयार कर ली गई थी. केयरटेकर तारक और उसका दोस्त विकास मेन प्लानर थे. इन लोगों ने पहले से पूरी प्लानिंग कर रखी थी, जब स्टॉक ज्यादा मात्रा में आएगा तो घटना को अंजाम दिया जाएगा. पूछताछ में आरोपियों ने बताया, खरमास खत्म होने के बाद लगन शुरू होता. गहने तैयार करने के लिए मुंबई से भरपूर मात्रा में सोना लाया गया था. इसके बाद प्लानिंग के तहत डुप्लीकेट चाबी तैयार कराई. तारक आजमगढ़ में पार्टी के बहाने विकास के साथ गया. जिस जगह सामान रखा था, वहां सैनुद्दीन ने शीशा तोड़ कर बिखेर दिया. जिससे पुलिस को लगे की किसी अज्ञात ने चोरी की घटना को अंजाम दिया है. लेकिन वहां लगे सीसीटीवी कैमरे में सब कुछ कैद हो गया. कैमरे की मदद से यह पूरा खुलासा हुआ है. इस योजना का मास्टर प्लानर शुभम, तारक, विकास और चिंटू हैं, जबकि दीपेश चौहान ने चाबी बनाने का काम किया था.



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