यूजीसी कानून के विरोध में परमहंसाचार्य ने पीएम मोदी से मांगी इच्छामृत्यु
- Jantantra Live

- 4 दिन पहले
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मांग -यूजीसी के संशोधित नियमों को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए

अयोध्या: यूजीसी के संशोधित नियमों के खिलाफ विरोध तेज़ हो गया है. तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगतगुरु परमहंसाचार्य ने इस मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इच्छा मृत्यु की मांग की है. उन्होंने कहा है कि यूजीसी द्वारा किए गए संशोधित नियम सवर्ण छात्र-छात्राओं के भविष्य के साथ अन्याय हैं और इससे शिक्षा व्यवस्था में असमानता पैदा होगी.
संशोधित नियमों को तत्काल वापस लें: जगतगुरु परमहंसाचार्य का कहना है कि यदि सरकार उनकी इच्छा मृत्यु की मांग पूरी नहीं करती है तो यूजीसी के संशोधित नियमों को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए. इन नियमों से योग्य छात्रों के अधिकारों का हनन हो रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि पूरे देश में यूजीसी के नियमों का विरोध किया जा रहा है. इस कड़ी में अब अयोध्या के संत समाज भी सवर्ण छात्र-छात्राओं के समर्थन में खुलकर सामने आ गए हैं.
विभिन्न मुद्दों पर सरकार को अल्टीमेटम दिया: संतों ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में किसी भी प्रकार का भेदभाव स्वीकार नहीं किया जाएगा. संत समाज ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द कोई निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा. अयोध्या की तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगतगुरु परमहंसाचार्य अपनी कट्टर छवि और विभिन्न मुद्दों पर सरकार को अल्टीमेटम देने के लिए जाने जाते हैं.
हिंदू राष्ट्र की मांग को लेकर जल समाधि: परमहंसाचार्य ने केंद्र सरकार से भारत को 'हिंदू राष्ट्र' घोषित करने की मांग की थी. उन्होंने घोषणा की थी कि यदि 2 अक्टूबर तक उनकी मांग पूरी नहीं हुई, तो वे सरयू नदी में जल समाधि ले लेंगे. इस घोषणा के बाद प्रशासन ने उन्हें उनके आश्रम में ही नजरबंद कर दिया था.
नूंह यात्रा में रुकावट पर आमरण अनशन: हरियाणा के नूंह में प्रवेश से रोके जाने पर परमहंसाचार्य ने सोहना टोल प्लाजा पर ही आमरण अनशन शुरू कर दिया था. उनका कहना था कि यदि उन्हें आगे नहीं जाने दिया गया या कहीं और शिफ्ट किया गया, तो वे वहीं अपना प्राण त्याग देंगे.
तपस्वी छावनी पीठ से इस्तीफा: एक विवाद के दौरान उन्होंने तपस्वी छावनी के महंत पद से इस्तीफा देने और हिंदू राष्ट्र के लिए अनशन जारी रखने की बात कही थी.
आत्मदाह की धमकी: पीठाधीश्वर जगतगुरु परमहंसाचार्य उदयनिधि स्टालिन के विवादित बयानों और रामचरितमानस की प्रतियों को जलाने जैसी घटनाओं के विरोध में भी कठोर कदम उठाने और आत्मदाह जैसी धमकियां देने के कारण चर्चा में रह चुके हैं.



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