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बागपत में छेड़छाड़ के आरोपी को पंचायत ने दी सजा; चप्पलों से पिटवाया

  • लेखक की तस्वीर: Jantantra Live
    Jantantra Live
  • 2 दिन पहले
  • 2 मिनट पठन


बागपत: उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में कानून को ताक पर रखकर 'पंचायत' द्वारा न्याय करने का मामला सामने आया है. यहां एक युवती से छेड़छाड़ के आरोपी युवक को न केवल पीड़िता से चप्पलों से पिटवाया गया, बल्कि पंचों ने उसे एक साल तक गांव में न घुसने का फरमान भी सुना दिया. इस पूरी कार्रवाई से स्थानीय पुलिस पूरी तरह बेखबर है.

छेड़छाड़ के बाद हुई पंचायत: ताजा मामला चांदीनगर और सिंघावली अहीर थाना क्षेत्र के बीच का है. यहां छेड़छाड़ के एक आरोपी को पंचायत ने सार्वजनिक रूप से अपमानित किया है. चांदीनगर क्षेत्र का रहने वाला एक युवक, जो गांव-गांव जाकर अनाज की खरीद-फरोख्त का काम करता है, चार दिन पूर्व सिंघावली अहीर क्षेत्र के एक गांव पहुंचा था. आरोप है कि युवती को घर में अकेला पाकर उसने छेड़छाड़ की, जिसके बाद परिजनों के विरोध पर मामला पुलिस तक पहुंचने वाला था. हालांकि, कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए बीच-बचाव करने वाले बिचौलिए तुरंत सक्रिय हो गए और पंचायत का मंच तैयार किया गया.

चप्पलों से पिटाई और एक साल के लिए निकाला: सोमवार को दोनों पक्षों की मौजूदगी में बुलाई गई पंचायत में समझौते के नाम पर बेहद अजीबोगरीब निर्णय लिए गए. पीड़ित युवती ने पंचायत के निर्देश पर आरोपित युवक की सबके सामने चप्पलों से पिटाई की, जिसे पंचायत ने न्याय का नाम दिया. इसके अलावा आरोपी को सख्त चेतावनी दी गई कि वह अगले एक वर्ष तक उस गांव की सीमा में कदम नहीं रखेगा. कानूनी पचड़ों और जेल जाने के डर से आरोपित पक्ष ने पंचायत की इन सभी शर्तों को चुपचाप स्वीकार कर लिया.

बागपत पुलिस मामले से अनजान: इस पूरी घटना और क्षेत्र में चल रही समानांतर न्याय प्रणाली की भनक स्थानीय पुलिस को नहीं लगी. सिंघावली अहीर थाना प्रभारी मनोज कुमार चाहल ने कहा कि हमारे संज्ञान में ऐसा कोई मामला नहीं आया है और न ही किसी ने कोई शिकायत दर्ज कराई है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के फरमान भारतीय दंड संहिता और संवैधानिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन हैं.

 
 
 

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