दिल्ली में सांस की बीमारियों से बढ़ी मौतें
- Jantantra Live

- 17 जन॰
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नई दिल्ली: दिल्ली में सांस से जुड़ी बीमारियों से होने वाली मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है. दिल्ली सरकार द्वारा जारी ताजा आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2024 में राजधानी में 9 हजार 211 लोगों की मौत सांस संबंधी बीमारियों के कारण हुई. यह संख्या वर्ष 2023 में 8,801 थी. यानी एक साल में ही इन बीमारियों से मौतों में साफ बढ़ोतरी दर्ज की गई है. बीते कुछ वर्षों से यह रुझान लगातार ऊपर की ओर बना हुआ है, जो चिंता का विषय माना जा रहा है. रिपोर्ट के अनुसार सांस से जुड़ी बीमारियों में दमा (अस्थमा), निमोनिया, फेफड़ों का कैंसर और टीबी जैसी बीमारियां शामिल हैं. इन बीमारियों के कारण लोगों को सांस लेने में दिक्कत, लंबे समय तक खांसी और कमजोरी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है. दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को भी इन बीमारियों की एक वजह माना जाता है.
दिल की बीमारियों से बढ़ी मौतों की संख्या: आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में मौतों का सबसे बड़ा कारण दिल और रक्त संचार से जुड़ी बीमारियां रहीं. इन बीमारियों से कुल 21 हजार 262 लोगों की मौत हुई. इनमें हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक और दिल की विफलता जैसी समस्याएं शामिल हैं. साल 2023 में इस श्रेणी में 15,714 मौतें दर्ज की गई थीं, यानी एक साल में इसमें भी बड़ा इजाफा हुआ है.
परजीवी रोग से हुई इतनी मौतें: दिल्ली में मौत का दूसरा बड़ा कारण संक्रामक और परजीवी रोग रहे. 2024 में ऐसे रोगों से 16 हजार 60 लोगों की जान गई. हालांकि यह आंकड़ा 2023 के मुकाबले कम है, जब इन बीमारियों से 20,781 मौतें हुई थीं. ये बीमारियां आमतौर पर बैक्टीरिया, वायरस और फंगस से फैलती हैं और गंदे पानी व दूषित भोजन के कारण बढ़ती हैं.
कुल मिलाकर राजधानी में 2024 में मौतों की संख्या बढ़कर 1 लाख 39 हजार 480 हो गई, जबकि 2023 में यह आंकड़ा 1 लाख 32 हजार 391 था. इनमें 85 हजार 391 पुरुष, 54 हजार 51 महिलाएं और 38 अन्य श्रेणी में दर्ज किए गए. इनमें से 90 हजार 883 मौतों का मेडिकल प्रमाणन किया गया.
शिशु मृत्यु दर में हुआ हल्का सुधार: राहत की बात यह है कि शिशु मृत्यु दर में हल्का सुधार दर्ज किया गया है. वर्ष 2024 में शिशु मृत्यु दर 22.4 प्रति एक हजार जीवित जन्म रही, जबकि 2023 में यह 23.61 थी. शिशु मृत्यु दर एक वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मौत को दर्शाती है. वर्ष 2024 में दिल्ली में 3 लाख 6 हजार 459 जीवित जन्म दर्ज किए गए, जो पिछले वर्ष से 8 हजार 628 कम हैं. जन्म दर घटकर 14 रह गई है, जबकि मृत्यु दर बढ़कर 6.37 हो गई है. विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती आबादी, प्रदूषण और जीवनशैली से जुड़ी समस्याएं स्वास्थ्य पर सीधा असर डाल रही हैं.
अगले 10 सालों में कितनी हो जाएगी आबादी?
आंकड़ों के अनुसार अगले 10 वर्षों में 2036 तक दिल्ली की आबादी बढ़कर करीब 2.65 करोड़ होने का अनुमान है. वहीं, 5 साल से कम उम्र के 99.1 प्रतिशत बच्चों के पास जन्म प्रमाण पत्र होना एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है.



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