दिल्ली में ठंड और गर्मी के दिनों में मरीजों के तिमारदारों के लिए अलग प्लान बनाने का आदेश
- Jantantra Live

- 4 दिन पहले
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दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड को दिया निर्देश

नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड को निर्देश दिया है कि अस्पतालों के आसपास मरीजों के तिमारदारों की सुविधा के लिए ठंड और गर्मी के दिनों के लिए अलग-अलग एक्शन प्लान तैयार करें. चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि ये योजनाएं प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज की देखरेख में बनी कमेटी की अनुशंसाओं के आधार पर होनी चाहिए.
हाईकोर्ट ने कहा कि गर्मी के लिए एक्शन प्लान जनवरी से फरवरी तक तैयार हो जाना चाहिए, जिसे मई और जून में लागू किया जाए. गर्मी के लिए एक्शन प्लान मौसम के मुताबिक जुलाई से अगस्त तक बढ़ाया जा सकता है. इसी तरह ठंड के लिए भी प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज की अध्यक्षता वाली कमेटी की अनुशंसाओं के मुताबिक योजना बनायी जाए.
दरअसल, 27 जनवरी को सुनवाई के दौरान एम्स ने मरीजों के तिमारदारों के लिए शेल्टर, भोजन, सुरक्षा और अन्य सुविधाओं संबंधी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल किया. कोर्ट ने इस बात पर गौर किया कि विभिन्न एजेंसियों के समन्वित प्रयास की वजह से जमीन पर अच्छे परिणाम देखने को मिले. इससे पहले सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया ठंड में बेघरों के लिए दिल्ली में 70 पैगोडा टेंट स्थापित किए गए हैं.
एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कोर्ट को सूचित किया था कि प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज के साथ हुई बैठक के बाद 70 पैगोडा टेंट स्थापित किए गए हैं. साथ ही सभी सबवे को अपने हाथ में लेकर सफाई की गई है. सुनवाई के दौरान जब एम्स अस्पताल की ओर से बताया गया था कि वो दो एकड़ भूमि में तीन हजार बेडों वाला विश्राम सदन स्थापित करने की योजना पर काम कर रहा है.
बता दें कि 14 जनवरी को दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा था कि भारत एक सामाजिक कल्याण वाला देश है और लोगों को शेल्टर के अधिकार से वंचित करना जीवन के अधिकार से वंचित करने जैसा है. हाईकोर्ट ने कहा था कि बेघर लोगों को शेल्टर देने के अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी से सरकार पल्ला नहीं झाड़ सकती हैं. हाईकोर्ट ने 12 जनवरी को इस मामले पर स्वत: संज्ञान लिया था.
चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली बेंच ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था. हाईकोर्ट ने कहा था कि ईश्वर न करें, लेकिन हमे कभी ऐसे खुले आसमान के नीचे रात गुजरानी पड़े तो हम पर न जाने क्या बीतेगी. सरकारी महकमे को इसे लेकर और ज़्यादा संवेदनशील होने की जरूरत है. हाई कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि वो राजधानी के शेल्टर होम में पर्याप्त जगह और सुविधाएं उपलब्ध कराए.



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