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दिल्ली में अब 1.20 लाख रुपये की वार्षिक आय वाले परिवारों का बनेगा राशन कार्ड

  • लेखक की तस्वीर: Jantantra Live
    Jantantra Live
  • 17 जन॰
  • 2 मिनट पठन

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने की दिशा में रेखा सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मुताबिक, दिल्ली में अब 1.20 लाख रुपये तक की वार्षिक पारिवारिक आय वाले परिवारों को राशन कार्ड का अधिकार मिलेगा. यह निर्णय हाल ही में दिल्ली कैबिनेट की बैठक में लिया गया है. सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि खाद्य सुरक्षा कोई एहसान नहीं, बल्कि गरीबों का अधिकार है.

नए नियमों के तहत प्राथमिकता परिवारों की पहचान के लिए आय सीमा को व्यावहारिक बनाया गया है. अब 1.20 लाख रुपये तक की सालाना पारिवारिक आय वाले परिवार खाद्य सुरक्षा के दायरे में आएंगे. पहले यह आय सीमा एक लाख रुपये थी. सरकार के इस फैसले का लाभ लेने के लिए राजस्व विभाग की ओर से जारी आय प्रमाणपत्र अनिवार्य किया गया है, जिससे स्व-प्रमाणन (सेल्फ वेरिफिकेशन) की व्यवस्था समाप्त होगी.

दिल्ली में रहने वाले इन लोगों को नहीं मिलेगा लाभ: दिल्ली सरकार के नए नियमों के अनुसार, ऐसे परिवार जिनके पास दिल्ली में ए से ई श्रेणी की कॉलोनियों में संपत्ति है, जो आयकर देते हैं, जिनके पास चार पहिया वाहन है (रोजी-रोटी के लिए इस्तेमाल होने वाला एक कमर्शियल वाहन इसमें शामिल नहीं है), जिनके परिवार का कोई सदस्य सरकारी सेवा में है या जिनके घर में 2 किलोवाट से अधिक का बिजली कनेक्शन है, इस योजना के पात्र नहीं होंगे.

जिला स्तर पर तय होगी प्राथमिकता: सीएम रेखा गुप्ता के मुताबिक, अब ‘पहले आओ-पहले पाओ’ की व्यवस्था समाप्त कर जिला स्तरीय समितियों के माध्यम से आवेदनों की जांच, स्वीकृति और क्रमबद्ध प्राथमिकता तय की जाएगी. इससे सबसे अधिक जरूरतमंद परिवारों को सूची में आगे स्थान मिलेगा. जिला स्तरीय समिति को प्राथमिकता निर्धारण की केंद्रीय इकाई बनाया गया है. इसकी अध्यक्षता डीएम या एडीएम करेंगे. समिति में स्थानीय विधायक और संबंधित अधिकारी भी शामिल होंगे. यह समिति आवेदनों की जांच कर उन्हें क्रमबद्ध करेगी, ताकि सबसे जरूरतमंद परिवारों को पहले लाभ मिले.

लंबित आवेदनों का जल्द होगा समाधान: मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्षों से स्पष्ट नियमों के अभाव में भारी बैकलॉग बना हुआ था. सरकार ने खाद्य सुरक्षा प्रणाली डेटा की जांच की. इसमें कई गड़बड़ियां पाई गईं. इसके आधार पर उन लोगों को सूची से हटाया है जो वास्तव में इसके हकदार नहीं थे. डेटा वेरिफिकेशन से पता चला कि लगभग 6 लाख 46 हजार 123 ऐसे लाभार्थी सामने आए जिनकी आय जानकारी नियमों से मेल नहीं खाती थी. 95 हजार 682 ऐसे लोग थे जो लंबे समय से सिस्टम में थे लेकिन लाभ नहीं ले रहे थे.

लगभग 23 हजार 394 नाम दोहराव में पाए गए. 6,185 मामलों में लाभ मृत लोगों के नाम पर दर्ज था. लगभग 56 हजार 372 लोगों ने खुद ही सिस्टम से बाहर होने का अनुरोध किया. इन सभी कारणों से कुल मिलाकर 8 लाख 27 हजार 756 से अधिक रिक्त स्थान बनें. यह भी पता चला कि वर्तमान में 3 लाख 89 हजार 883 से अधिक आवेदन लंबित हैं और 11 लाख 65 हजार 965 से अधिक लोग खाद्य सुरक्षा का इंतजार कर रहे हैं. अब इन खाली जगहों पर वर्षों से राशन कार्ड या खाद्य सुरक्षा का इंतजार कर रहे लोगों को शामिल किया जाएगा.

 
 
 

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