किन्नर अखाड़ा ने ममता कुलकर्णी को बाहर निकाला
- Jantantra Live

- 4 दिन पहले
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अविमुक्तेश्वरानंद मामले पर कहा था- 10 में से 9 शंकराचार्य झूठे

प्रयागराज : शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर विवादित बयान देने पर महामंडलेश्वर ममता कुलकर्णी को किन्नर अखाड़े से बाहर निकाल दिया गया है. अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने वीडियो जारी कर बताया कि अखाड़े के पदाधिकारियों से विचार-विमर्श के बाद यह फैसला किया गया है. उन्होंने कहा कि अब ममतानंद गिरि का अखाड़े से कोई संबंध नहीं है. वह न पदाधिकारी हैं, न सदस्य.
डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने कहा, ज्योतिष पीठ से जुड़े विवादों के कई ऐतिहासिक और परंपरागत आयाम हैं, जिन पर अखाड़ा कोई पक्ष नहीं लेता. मौनी अमावस्या स्नान के दौरान बटुकों के साथ कथित दुर्व्यवहार की घटना पर दुखद है. किसी भी संवेदनशील विषय पर अखाड़े की अनुमति के बिना बयान देना संगठनात्मक मर्यादा का उल्लंघन है.
आचरण पर उठाए थे सवाल : 25 जनवरी को ममतानंद गिरि उर्फ ममता कुलकर्णी ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की भूमिका और आचरण पर सवाल उठाए थे. कहा था कि 10 में से 9 शंकराचार्य झूठे हैं. उनके ज्ञान के स्तर पर भी सवाल उठाए थे. उनसे दो सवाल भी किए थे, जिसमें शंकचारार्य की नियुक्ति के संबंध में था और दूसरा करोड़ों की भीड़ में पालकी लेकर निकलने की क्या जरूरत थी? उन्होंने कहा था कि ऊंचे धार्मिक पद पर बैठने से पहले व्यक्ति को अहंकार छोड़ना चाहिए.
धर्म और राजनीति अलग-अलग : ममतानंद गिरि उर्फ ममता कुलकर्णी ने कहा था कि शंकराचार्य के चलते उनके शिष्यों को पिटाई और अपमान झेलना पड़ा. अगर स्नान ही करना था तो पालकी से उतरकर किया जा सकता था. यह भी कहा था कि धर्म और राजनीति दोनों अलग-अलग चीजें हैं. धर्म में राजनीति और राजनीति में धर्म को नहीं घुसाना चाहिए. उनके इन बयानों को अखाड़े ने अनुशासन और मर्यादा के विरुद्ध माना.
महाकुंभ में मिली थी महामंडलेश्वर की उपाधि : ममतानंद गिरि उर्फ ममता कुलकर्णी पहले भी चर्चा में रही हैं. महाकुंभ के दौरान 23 जनवरी 2025 को किन्नर अखाड़े ने उन्हें महामंडलेश्वर की उपाधि दी थी. उस समय संत समाज के कुछ वर्गों ने इस निर्णय पर आपत्ति जताई थी. बाद में उन्होंने स्वयं पद छोड़ने की घोषणा की, फिर कुछ ही दिनों में अपना फैसला वापस ले लिया. उनके कई सार्वजनिक बयानों ने समय-समय पर धार्मिक और राजनीतिक हलकों में बहस छेड़ी. हालांकि बाद में वो फिर महामंडलेश्वर के पद पर बनी रहीं.
धार्मिक जीवन अपनाने से पहले ममता कुलकर्णी फिल्म जगत का जाना-पहचाना चेहरा रही हैं. 1990 के दशक में उन्होंने कई हिंदी फिल्मों में काम किया और लोकप्रियता हासिल की. बाद के वर्षों में उन्होंने आध्यात्मिक मार्ग अपनाने की बात कही और सार्वजनिक जीवन से दूरी बनाने का दावा किया. हालांकि, समय-समय पर दिए गए उनके बयानों ने उन्हें सुर्खियों में बनाए रखा.



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