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उन्नाव रेप पीड़िता के समर्थन में दिल्ली के छात्र संगठनों का विरोध प्रदर्शन

  • लेखक की तस्वीर: Jantantra Live
    Jantantra Live
  • 28 दिस॰ 2025
  • 2 मिनट पठन

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ की अध्यक्ष अदिति और संयुक्त सचिव दानिश भी जंतर-मंतर पर हुए इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए



नई दिल्ली: उन्नाव रेप मामले में दोषी पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा जमानत दिए जाने के फैसले के खिलाफ रविवार को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया गया. जंतर-मंतर पर उन्नाव रेप पीड़िता के समर्थन में नागरिकों, छात्र संगठनों और महिला संगठनों ने एकजुट होकर न्याय की मांग की. इस प्रदर्शन में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA), ऑल इंडिया प्रोग्रेसिव वुमेंस एसोसिएशन (AIPWA) सहित कई प्रगतिशील संगठनों के कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया.

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (JNUSU) की अध्यक्ष अदिति और संयुक्त सचिव दानिश भी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए. जेएनयू के कई छात्र-छात्राओं ने भी पीड़िता के समर्थन में नारे लगाए. प्रदर्शन में शामिल संगठनों ने आरोप लगाया कि मौजूदा भाजपा सरकार के शासन में बलात्कारियों को लगातार संरक्षण मिल रहा है, जिससे देश में “रेप कल्चर” को बढ़ावा दिया जा रहा है. प्रदर्शन में शामिल संगठनों ने ये भी आरोप लगाया कि पुलिस भी इस व्यवस्था का हिस्सा बनकर पीड़िताओं के बजाय आरोपियों के पक्ष में खड़ी दिखाई देती है. चाहे पहलवानों का आंदोलन हो या उन्नाव रेप पीड़िता का संघर्ष, हर बार न्याय की मांग करने वाली महिलाओं पर ही दमन किया जा रहा है. प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को महिलाओं के खिलाफ बताया और इसे “न्याय की हत्या” करार दिया.

JNUSU अध्यक्ष अदिति ने कहा कि केंद्र सरकार बलात्कारियों को बचाने पर आमादा है. हाथरस से लेकर उन्नाव तक एक ही पैटर्न दिखाई देता है, जहां बलात्कारियों को माला पहनाई जाती है और उन्हें राजनीतिक संरक्षण दिया जाता है., जबकि, पीड़ित महिलाओं को धमकाया जाता है, हिरासत में लिया जाता है. उन्होंने कुलदीप सिंह सेंगर की जमानत तुरंत रद्द करने और पीड़िता व उसके परिवार को सुरक्षा देने की मांग की. उन्होंने कहा कि इस तरह के फैसले न केवल पीड़िताओं का मनोबल तोड़ते हैं, बल्कि समाज में अपराधियों को खुला संदेश देते हैं. JNUSU संयुक्त सचिव दानिश अली ने कहा कि इस देश में बलात्कार पीड़िताओं को न्याय के लिए लगातार संघर्ष करना पड़ता है. उन्होंने सरकार के “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” नारे पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह सरकार महिलाओं के लिए एक भी सुरक्षित स्थान सुनिश्चित करने में विफल रही है. उन्होंने कहा कि जमानत के फैसले के बाद से उन्नाव की पीड़िता लगातार विरोध कर रही है, लेकिन उसे इंडिया गेट और संसद भवन के बाहर हिरासत में लिया गया.


 
 
 

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