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अलीगढ़ में 'विराट हिंदू सम्मेलन' के दौरान साध्वी प्राची को बीच में रोकना पड़ा भाषण

  • लेखक की तस्वीर: Jantantra Live
    Jantantra Live
  • 6 दिन पहले
  • 2 मिनट पठन

यूजीसी के नए नियमों का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों का प्राची को करना पड़ा सामना



अलीगढ़: अलीगढ़ के अचलताल स्थित रामलीला मैदान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 'विराट हिंदू सम्मेलन' के दौरान साध्वी प्राची को यूजीसी (UGC) के नए नियमों का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों का सामना करना पड़ा. कार्यक्रम में पहुंचीं साध्वी प्राची के संबोधन के बीच प्रदर्शनकारी मौके पर पहुंचे और उन्होंने एक्ट को वापस लेने की मांग को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी.

UGC में बदलाव जरूरी है: साध्वी प्राची ने मंच से हंगामे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि UGC में बदलाव जरूरी है और वह आंदोलनकारियों की बात समझती हैं. उन्होंने प्रदर्शनकारियों से कार्यक्रम को सफल बनाने की अपील की और कहा कि मैं आपके साथ हूं, चिंता मत करिए.

हिंदू हिंदू भाई-भाई, जात-पात की करो विदाई: इस कार्यक्रम के दौरान मंच से 'हिंदू हिंदू भाई-भाई, जात-पात की करो विदाई' जैसे नारे लगाए गए. इसी बीच यह भी देखने में आया कि कार्यक्रम स्थल पर पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था बेहद कमजोर नजर आई. हंगामे के दौरान किसी तरह की निगरानी या बैरिकेडिंग दिखाई नहीं दी, जिस पर बाद में सवाल भी उठे. हंगामा बढ़ने पर साध्वी प्राची ने मंच से कड़ा लहजा अपनाया. उन्होंने कहा कि ज्यादा नेता गर्दी न झाड़िए, शांति से बैठ जाइये. उन्होंने भारत सरकार से निवेदन करने की बात भी कही.

संविधान की धारा 13 पर सवाल उठाए: साध्वी प्राची ने संविधान की धारा 13 पर भी सवाल उठाए और कहा कि इस धारा के तहत एक विशेष समुदाय को अपने धर्म की शिक्षा देने का अधिकार है, जबकि हिंदू अपने धर्म की शिक्षा स्कूल या कॉलेज में नहीं दे सकते. इस व्यवस्था पर पुनर्विचार होना चाहिए और हिंदुओं को अपनी सुरक्षा को लेकर सतर्क रहना चाहिए. उन्होंने कहा कि 'कायदे में रहोगे तो फायदे में रहोगे. यह बात भले ही कड़वी लगें, लेकिन कब तक चुपचाप रहा जाए.

दलित और पिछड़े वर्ग को ज्यादा संरक्षण: साध्वी प्राची ने कहा कि उन्होंने एक्ट को पढ़ा नहीं है, केवल सुना है कि इसमें दलित और पिछड़े वर्ग को ज्यादा संरक्षण दिया गया है. सवर्ण वर्ग के लोग इसका विरोध कर रहे हैं. वह इस मुद्दे पर भारत सरकार के मंत्रियों से बात करेंगी और अगर विरोध हो रहा है, तो इसमें कुछ बदलाव किए जा सकते हैं. विरोध की बजाय सरकार को समर्थन देते हुए अपने सुझाव और विचार रखने चाहिए, क्योंकि सरकार अच्छा काम कर रही है.

पिछली सरकारों में संतों पर लाठीचार्ज हुआ था: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर साध्वी प्राची ने कहा कि माघ मेला एक बड़ा आयोजन होता है. वहां व्यापक व्यवस्थाएं होती हैं. यदि सभी पैदल जा रहे थे, तो महाराज जी को भी पैदल जाना चाहिए था. उनको शांत हो जाना चाहिए. हिंदुओं की सरकार है और पहले की सरकारों में संतों पर लाठीचार्ज तक हुआ है. तब इस तरह का विरोध नहीं देखा गया.

प्रकरण को राजनीतिक रूप देने की कोशिश: प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने अपनी बात रखी, तो साध्वी ने ठोस जवाब देने के बजाय "हिंदू-हिंदू भाई-भाई" के नारों के जरिए मामले को राजनीतिक रूप देने की कोशिश की. यह विरोध प्रदर्शन मुख्य रूप से यूजीसी संशोधन-2026 के खिलाफ था, जिसमें उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव खत्म करने के नए नियमों के तहत सामान्य वर्ग के छात्रों को दुरुपयोग और उत्पीड़न का डर है.

 
 
 

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