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अयोध्या राम मंदिर दान गबन विवाद: 15 दिनों में फाइनल रिपोर्ट देगी एसआईटी

  • लेखक की तस्वीर: Jantantra Live
    Jantantra Live
  • 6 दिन पहले
  • 3 मिनट पठन


लखनऊ: अयोध्या राम मंदिर में दान पात्रों की राशि में कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने स्वयं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से एसआईटी का गठन कर उच्च स्तरीय जांच कराने का अनुरोध किया गया था. शासन ने ट्रस्ट के अनुरोध पर एसआईटी का गठन शनिवार को कर दिया. यह टीम 7 दिन में प्रारंभिक रिपोर्ट और 15 दिन में फाइनल रिपोर्ट सरकार को देगी. इस कमेटी में लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी रेंज किरन एस और विशेष सचिव वित्त नील रतन शामिल हैं.

ट्रस्ट का कहना है कि करोड़ों देश-विदेश के भक्तों की अटूट आस्था से जुड़े इस पावन मामले की पूरी तरह से पारदर्शी और निष्पक्ष जांच होना बेहद आवश्यक है, ताकि सोशल मीडिया पर चल रही तमाम तरह की भ्रामक अफवाहों पर तत्काल पूर्णविराम लग सके. राज्य सरकार के प्रवक्ता के अनुसार राम मंदिर के दान पात्रों में दान की गई बहुमूल्य धनराशि की चोरी के संबंध में फैल रही अफवाहों को लेकर ही ट्रस्ट ने मुख्यमंत्री से यह अनुरोध किया था.

विक्रम तिवारी ने मुकदमा दर्ज करने की मांग की: अयोध्या निवासी विक्रम तिवारी ने कोतवाली अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की है और उन्होंने प्रार्थना पत्र दिया है. उन्होंने लिखा है कि खबरों के माध्यम से संज्ञान में आया है कि श्रीराम मंदिर में श्र‌द्धालुओं द्वारा अर्पित दानराशि के प्रबंधन में कथित अनियमितता की बात सामने आयी है. कुछ कर्मचारियों की संलिप्तता की आशंका व्यक्त की गई है तथा नकदी बरामद होने की बात सामने आई है. इसके लिए तत्काल प्रभाव से FIR दर्ज करने के साथ स्वतंत्र एजेंसी से जांच हो.

सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान जज से जांच कराने की मांग: वाराणसी पहुंचे काली सेना के संस्थापक स्वामी आनंद स्वरूप ने कहा कि चंदा चोरी को लेकर जो भ्रम की स्थिति बनी हुई है, उसे खत्म करना चाहिए और अपने ही ट्रस्ट के लोग भाजपा और आरएसएस लोग मिलकर की एक कमेटी बना देंगे और उसकी जांच करेगी. यह बिल्कुल सही नहीं है. भाई चोरी भी हम ही करेंगे. जांच भी हम ही करेंगे निष्पक्ष रूप से किसी न्यायाधीश या सुप्रीम कोर्ट के जज से इसकी जांच कराई जाए. भारत के सभी मंदिरों को सरकार से मुक्त करने को लेकर काशी में रविवार को हिंदू महापंचायत होगी, जिसका नाम हिंदू महासंगम है.

पूर्व लेखा प्रभारी ने लगाए ट्रस्ट पर गंभीर आरोप: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने आधिकारिक रूप से इस पूरे प्रकरण को महज एक सोची-समझी दान चोरी की अफवाह और दुष्प्रचार माना है. यह पूरा विवाद तब देश भर की सुर्खियों में आया जब राम मंदिर के पूर्व मुख्य लेखा प्रभारी महिपाल सिंह ने दावा किया कि मंदिर के चढ़ावे की गिनती के दौरान बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं की जा रही थीं. उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि पूर्व में एक बार उन्होंने स्वयं अपनी सतर्कता से लगभग 5 लाख रुपये की नकद चोरी को रंगेहाथ पकड़ा था, लेकिन उच्च अधिकारियों से लिखित शिकायत करने के बाद उन्हें न्याय देने के बजाय उल्टे नौकरी से ही निष्कासित कर दिया गया. महिपाल सिंह ने अपने दावों को और मजबूत करते हुए यह भी संगीन आरोप लगाया कि मंदिर परिसर के कुछ महत्वपूर्ण CCTV फुटेज को जानबूझकर डिलीट कर दिया गया है और भक्तों द्वारा चढ़ाए गए सोने-चांदी व अन्य कीमती आभूषणों का कोई भी पारदर्शी डिजिटल रिकॉर्ड नहीं रखा गया है.

चंपत राय ने किया आरोपों का खंडन: ट्रस्ट के प्रभावशाली महासचिव चंपत राय ने पूर्व लेखा प्रभारी द्वारा लगाए गए इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इनका कड़ा खंडन किया है. उन्होंने कहा कि राम मंदिर में भक्तों के दान संग्रह, उसकी दैनिक गिनती, सुरक्षित परिवहन और अंततः अधिकृत बैंक में जमा करने की पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से कंप्यूटरीकृत और पारदर्शी है. उन्होंने बताया कि देश के प्रतिष्ठित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के विशेषज्ञ अधिकारियों के साथ मंदिर के खातों का नियमित रूप से वित्तीय ऑडिट किया जाता है और अब तक की जांच में किसी भी प्रकार के बड़े वित्तीय गबन की कोई पुष्टि नहीं हुई है. हालांकि, विवाद को बढ़ता देख ट्रस्ट ने आंतरिक स्तर पर भी एक विस्तृत जांच शुरू कर दी है, जिसमें मुख्य रूप से पिछले महीनों के सीसीटीवी फुटेज की पुनरीक्षा और कैश हैंडलिंग प्रक्रिया की गहन पड़ताल शामिल है.

 
 
 

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