top of page

300 करोड़ से ज्यादा की ठगी करने वाला इंटरस्टेट नेटवर्क ध्वस्त

  • लेखक की तस्वीर: Jantantra Live
    Jantantra Live
  • 24 जन॰
  • 2 मिनट पठन

फर्जी ऑनलाइन ट्रेडिंग स्कैम में शामिल 4 शातिर दिल्ली पुलिस के शिकंजे में



नई दिल्ली: दिल्ली क्राइम ब्रांच की इंटर स्टेट सेल ने फर्जी ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर देशभर में करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले एक बड़े साइबर स्कैम नेटवर्क का खुलासा किया है. इस गिरोह ने नकली मोबाइल ऐप और टेलीग्राम ग्रुप के जरिए निवेशकों को मोटे मुनाफे का झांसा देकर करीब 300 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी को अंजाम दिया. इस मामले में कोलकाता और लखनऊ से चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है.

जांच में सामने आया है कि आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे व्हाट्सऐप, टेलीग्राम, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर फर्जी विज्ञापन डालकर लोगों को “गारंटीड हाई रिटर्न” का लालच देते थे. संपर्क में आने के बाद पीड़ितों को वेंचुरा सिक्योरिटीज, गो मार्केट ग्लोबल और आईपीओ स्टॉक ट्रेडिंग जैसे नाम वाले फर्जी टेलीग्राम ग्रुप्स में जोड़ा जाता था, जो नाम से असली ब्रोकरेज कंपनियों की नकल करते थे. इसके बाद पीड़ितों को एक नकली ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड कराया जाता, जिसमें फर्जी डैशबोर्ड पर मुनाफा दिखाया जाता था.

फर्जी ऑनलाइन ट्रेडिंग स्कैम का भंडाफोड़: शुरुआत में भरोसा जीतने के लिए थोड़ी रकम वापस भी की जाती थी, लेकिन जैसे ही निवेशक बड़ी राशि डालता, उससे टैक्स, चार्ज या एक्टिवेशन फीस के नाम पर और पैसे मांगे जाते थे. अंत में पीड़ित की पूरी रकम म्यूल अकाउंट्स के जरिए हड़प ली जाती थी. डीसीपी आदित्य गौतम ने बताया कि आई4सी प्लेटफॉर्म पर मिली शिकायतों और बैंक ट्रांजैक्शन के विश्लेषण से इस नेटवर्क का खुलासा हुआ. जांच में 200 से ज्यादा बैंक ब्रांचों की केवाईसी और मनी ट्रेल खंगाली गई, जिसमें कोलकाता में फर्जी कंपनियां बनाकर सैकड़ों बैंक खाते खुलवाने वाले एक सिंडिकेट का पता चला.

300 करोड़ से ज्यादा की ठगी: सबसे पहले कोलकाता के बिस्वजीत मंडल को गिरफ्तार किया गया, जो फर्जी खातों की सप्लाई करता था.उसकी निशानदेही पर अशिष अग्रवाल को पकड़ा गया, जिसने आगे राजिब शाह और शुबहम शर्मा के नाम उजागर किए. राजिब शाह को लखनऊ से और शुबहम शर्मा को कोलकाता से गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि इस नेटवर्क के तार कंबोडिया स्थित ऑपरेटर्स से जुड़े हैं, जो क्रिप्टो करेंसी के जरिए पैसों का लेनदेन कराते थे. आरोपियों के पास से 39 मोबाइल फोन, 258 सिम कार्ड, एटीएम कार्ड, चेकबुक, लैपटॉप और बैंक दस्तावेज बरामद किए गए हैं, जबकि 19 लाख रुपये फ्रीज किए गए हैं.पुलिस के अनुसार गिरोह पिछले 4–5 वर्षों से सक्रिय था और देशभर में 2500 से ज्यादा शिकायतें दर्ज हैं. आगे की जांच में अन्य सहयोगियों और अंतरराष्ट्रीय कड़ियों को खंगाला जा रहा है.

 
 
 

टिप्पणियां

5 स्टार में से 0 रेटिंग दी गई।
अभी तक कोई रेटिंग नहीं

रेटिंग जोड़ें
bottom of page